Computers की पीढ़ियाँ क्या है?

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ 

Computer जिस तरह हम मनुष्यों की पीढियां होती है ठीक उसी प्रकार की भी पीढियां है इसकी शुरुआत 1940 से शुरु हुई थी हर एक पीढ़ी के अंतर्गत कम्प्यूटर मे कुछ न कुछ विकास किया गया है पहले कम्प्यूटर आकार मे बहुत बड़े हुआ करते थे जो उसकी पीढ़ियों के विकसित होने के साथ-साथ छोटे होने लगे और आज इसका आकार बहुत ही छोटा हो गया है। 

कम्प्यूटर कंपनियां बदलती पीढ़ी के साथ नये-नये कामो को अंजाम देती है जैसे:- आकार मे परिवर्तन, गति मे परिवर्तन, नये आविष्कार आदि। ये 1st gen से शुरु होकर आज 9th gen तक आ पहुँची है। कम्प्यूटर के क्षेत्र मे हो रहे निरंतर विकास को देखते हुए ये बोलना गलत नहीं होगा की वो दिन दुर नहीं है जब हम कम्प्यूटर को अपने साथ जेब मे लेकर चल सकेंगे और पहले से अधिक गति के साथ उसका उपयोग कर सकेंगे। 

       Computers की पीढ़ियाँ क्या है?

Computer की प्रथम पीढ़ी की शुरुआत सन् 1946 में एकर्ट और मुचली के एनिएक (ENIAC-Electronic Numerical Integrator And Computer) नामक Computer के निर्माण से हुआ था इस पीढ़ी के कम्‍प्‍यूटरों में वैक्‍यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था जिसका आविष्‍कार सन् 1904 John Ambrose Fleming ने किया था इस पीढ़ी में एनिएक के अलावा और भी

Generations of Computers

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – सन् 1946 में प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर के विकसित होने के साथ ही, कम्प्यूटर में नित नए शोध विकास की प्रक्रिया अनवरत चल रही है। कम्प्यूटर के सन्दर्भ में पीढ़ी (Generation) का आशय कम्प्यूटर तकनीक  में एक नया कदम है। मूल रूप से कम्प्यूटर में प्रयुक्त हार्डवेयर तकनीक के परिवर्तन से पीढ़ी का परिवर्तन दर्शाया गया है। 

Computers की पीढ़ियाँ क्या है?


कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – कम्प्यूटर के आज तक के विकास को पांच पीढ़ियों में बांटा गया है-

  • प्रथम पीढ़ी (First Generation)                 –          सन् 1940 से 1956 सन्  (वेक्यूम ट्यूब)
  • द्वितीय पीढ़ी (Second Generation)          –         सन् 1956 से 1964 सन्   (ट्रांजिस्टर)
  • तृतीय पीढ़ी (Third Generation)               –         सन् 1964 से सन् 1970 (एकीकृत सर्किट) 
  • चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation)             –           सन् 1970 से न् 1980 (माइक्रोप्रोसेसर)
  • पंचम पीढ़ी (Fifth Generation)                 –           भविष्य के कम्प्यूटर्स    (कृत्रिम बुद्धि) 

प्रथम पीढ़ी (First Generation)

सन् 1940 से सन् 1956 तक विकसित हुए Computers को प्रथम पीढ़ी Computers के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इस पीढ़ी के Computers में डायोड वाल्व वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया गया था। 

इस डायोड वाल्व नामक वैक्यूम ट्यूब का आविष्कार सर एम्ब्रोज फ्लेमिंग ने सन् 1904 में किया था। इन्हें थर्मोनियोनिक वॉल्व (Thermionic Valve) का नाम भी दिया गया। चूंकि इसमें दो इलैक्ट्रोड्स (Electrodes) होते थे-कैथोड (Cathode) और एनोड (Anode); इसीलिए इसे डायोड (Diode) कहा गया और चूंकि Cathode से इलैक्ट्रॉन Anode की ओर ही जाते थे; इसीलिये इसे वाल्व (Valve) कहा गया।

इसके वाल्व होने के कारण इसे केवल Electronic Switch की भांति प्रयोग किया गया था। ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Calculator) प्रथम Electronic Computer, प्रथम पीढ़ी का कम्प्यूटर है।  

बिनॉक (BINAC) का निर्माण ENIAC बनाने वाली कम्पनी ने ही सन् 1949 में किया था। ENIAC और BINAC के निर्माता एकर्ट और माचली ने व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये यूनिवैक (Universal Automatic Calculator-UNIVAC) बनाया। यूनिवैक वह प्रथम Electronic Computer था, जिसका Use आम जनता के बीच किया गया।

सन् 1949 में इंग्लैण्ड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक Computer एडसैक (EDSAC) बनाया। BINAC और UNIVAC में पारे पर डेटा का Store किया जाता था, परन्तु EDSAC में कैथोड रे ट्यूब पर Memory Store होती थी। Electro-Mechanical Computer के निर्माण में अग्रणी I.B.M. ने सन् 1952 में कम्प्यूटर मॉडल-101 बनाया। 

इस कम्प्यूटर में Memory Store करने के लिये मैग्नेट टेप के साथ कैथोड और अत्यधिक मेमोरी के लिये चुम्बकीय ड्रम का Use किया गया था। इस कम्प्यूटर में Data Input के लिये Punched Cards का प्रयोग किया जाता था। प्रथम पीढ़ी के अन्य मुख्य कम्प्यूटर्स IBM-650, IBM0702, IBM-704 आदि हैं।

द्वितीय पीढ़ी (Second Generation)

सन् 1956 से सन् 1964 तक विकसित हुए Computers को द्वितीय पीढ़ी के Computers के कहा जाता है। सन् 1948 में ट्रांजिस्टर के आविष्कार ने इलैक्ट्रॉनिक टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में एक क्रांति-सी ला दी। द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स के वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का Use किया गया। 

सिलीकॉन युक्त ट्रांजिस्टर के बनने के बाद Computers ही क्या, सभी इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों में डायोड वॉल्व काUse अत्यन्त कम हो गया। सन् 1952 में विकसित हुए Field Effect Transistor को एक स्थिति से दूसरी स्थिति में पहुंचने में मात्र एक माइक्रोसैकेण्ड ही लगता था।

सन् 1953 में M.रॉस द्वारा बनाये गये ट्रांजिस्टर को एक स्थिति से दूसरी स्थिति में पहुंचने में लगने वाला Time लगभग एक नैनो सैकण्ड (एक सैकेण्ड का अट्ठारहवां भाग) था। यह ट्रांजिस्टर जरमेनियम (Germanium) का बनाया गया था। द्वितीय पीढ़ी के Computers प्रथम पीढ़ी के Computers की तुलना में आकार में छोटे थे और इनमें ऊष्मा विकरण भी कम होता था। 

इन Computers की कार्य करने की गति एवं क्षमता भी इससे पूर्व के Computers की अपेक्षा अधिक थी। सन्1959 में I.B.M.  ने पूरी तरह से ट्रांजिस्टर पर आधारित एक Computer बनाया जिसका नाम था MODEL-7090। स्पेरी यूनीवैक-3, हनीवैल 400, 800, CDC 1604, CDC 3600, लियो का Mark-3 आदि द्वितीय पीढ़ी के मुख्य Computers थे।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – द्वितीय पीढ़ी के Computers में Moduler Design का प्रयोग होने लगा था। कम्प्यूटर की Programming के लिये Assembly Language का प्रयोग किया जाने लगा। इसमें कुछ विशेष चिन्हों का प्रयोग भी किया जाना था। द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर में Storage के लिये चुम्बकीय कोर का Use किया जाना भी इस समय की एक महत्वपूर्ण घटना थी। चुम्बकीय कोर छोटे-छोटे फैराइट के बने छल्ले थे।

इनका व्यास (Diameter) 0.02 इंच था और इन्हें Clockwise और Anti Clockwise दोनों ओर चुम्बकित (Megnatise) किया जाता था। ये दोनों दिशायें 0 और 1 का प्रतिनिधित्व करती थीं। कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – द्वितीय पीढ़ी के Computers की मेमोरी लगभग 100 किलोबाइट्स थी। इसी दौरान कुछ उच्चस्तरीय Programming Languages Fortran, Cobol आदि का भी विकास हुआ। इस उच्चस्तरीय भाषाओं में अंग्रेजी के शब्दों में ही प्रोग्रामिंग की जा सकती थीं।

तृतीय पीढ़ी (Third Generation)

सन् 1964 से 1970 तक के Computers को Third Generation में रखा गया। इस पीढ़ी के Computers में ट्रांजिस्टर के स्थान पर Integrated Circuits का प्रयोग होने लगा था। एक I.C. में ट्रांजिस्टर, रेजिस्टर और कैपेसिटर तीनों को ही समाहित कर लिया गया। 

सन् 1938 में टेक्सास इन्स्ट्रुमेन्ट कम्पनी के J.S. किल्वी ने सिलीकॉन के छोटे से चिप (Chip) पर एक Integrated Circuit बनाया। इस चिप में किसी उपकरण के सरकिट के 26 भागों को अत्यन्त छोटे आकार (नाखून के आकार) की चिप पर उतार लिया गया, जिन्हें तारों से जोड़कर धातु छपे सरकिट्स (DCBS) पर लगाया गया।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – इस प्रयोग से सफलता प्राप्त करने के बाद हजारों भागों को छोटे चिप पर बनाया जाने लगा। सन् 1953 में हार्विच जॉनसन ने इस तकनीक को MOSCFET (Metal Oxide Semi-Conductor Field Effect Transistor) के नाम से पेटेन्ट करा लिया। 

सन् 1966 में एक ही चिप पर हजारों ट्रांजिस्टर को बना पाना सम्भव हो गया। इस कारण Computers का आकार इससे पहले की पीढ़ियों की तुलना में अत्यन्त छोटा हो गया अर्थात् जहां पहले कम्प्यूटर के लिए एक कमरे की आवश्यकता होती थी, अब एक अलमारी के बराबर स्थान में ही कम्प्यूटर का स्थापन किया जा सकता था।

इस पीढ़ी के Computers में Video Display unit का भी Use होने लगा। इस पीढ़ी के मुख्य Computers I.B.M. का System-360m DEC (Digital Equipment Corporation) का Programable Data Processor-1 (PDP-1), PDP-5, PDP-5, PDP-8, ICL 1900, और UNIVAC 1108 और 9000 थे।

चतुर्थ पीढ़ी (Forth Generation)

सन् 1970 से लेकर 1980 तक के Computers को चतुर्थ पीढ़ी के Computers में रख गया है। Large Scale Integration (LSI) और फिर सन् 1975 में Very Large Scale Integration (VLSI) चिप के निर्माण से पूरी Control Processing Unit का ही एक चिप पर आ पाना सम्भव हो पाया। इन चिपों को Microprocessor और जिन Computers में Microprocessors का Use किया गया, उन्हें Micro Computer कहा गया। 

इन्टेल-8080 पर आधारित पहला माइक्रोकम्प्यूटर ‘आल्टेयर’ बनाया गया जिसकी मेमोरी (memory) एक किलोवाट थी।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – 1976 के आस-पास अन्य कम्पनीज़ ने भी इस प्रकार के Computer बना लिये, जिनमें से कुछ ने जीलॉग (Zilog) कम्पनी के 7-80 चिप लगाये। कैम्ब्रिज के वैज्ञानिक क्लाइव सिन्क्लेयर ने 1970 में एक छोटा और सस्ता कैलकुलेटर बनाया, जिसके आधार पर जापानियों ने पहले पॉकेट कैलकुलेटर बनाये जो आज घर-घर में पहुंच गये हैं। 

सिन्क्लेयन ने Zx-80 नाम का एक छोटा Computer बनाया जिसे रंगीन टी.वी. से जोड़कर स्क्रीन पर Computer के परिणाम देखे जा सकते थे। इस Computer पर अनेक प्रकार के खेल भी खेले जा सकते थे।

1976 में दो अमेरिकी विद्यार्थियों स्टीव बेजनाइक और स्टीव जॉन ने बहुत कम खर्च में एक ऐसा Computer बना डाला जिसे एक माचिस की डिब्बी में बंद किया जा सकता था। 

इस खोज ने Computer की दुनिया में क्रांन्ति सी ला दी। इन आठ बिटों पर आधारित माइक्रो कम्प्यूटर को एप्पल नाम दिया गया जिस पर बाद में एप्पल-1 और एप्पल-2 श्रृंखला का निर्माण हुआ। एप्पल-2 पर्सनल कम्प्यूटर नाम दिया गया। अन्य कम्पनियों ने भी अपनी-अपनी तकनीक पर आधारित माइक्रोप्रोसेसर चिप बनाये।

जैसे इन्टेल ने 8080, 8085, 8086, 80286, 80486, पेन्टियम, मोटरोला 6800, 68000 और जीलॉग 7-80, Z-8001 आदि। इस सीरीज के मुख्य Computers एप्पल-1, एप्ल-2 कामडोर का PET, BBC का अकॉर्न, स्पैक्ट्रम आदि हैं। IBM के बनाये गये PC कम्प्यूटर्स ने Computer बाजार पर अधिकार-सा कर लिया। ये Computer निश्चय ही क्षमता में तो एप्पल Computers से कम थे, परन्तु कीमतें अपेक्षाकृत अत्यन्त कम होने के कारण इनका प्रयोग बहुतायत में किया जाने लगा।

पंचम पीढ़ी (Fifth Generation)

वैज्ञानिक अब Fifth Generation के Computers पर कार्य कर रहे हैं। इस Generation के Computers में मानव सदृश गुणों को समाहित करने का प्रयास किया जा रहा है। 

जापान के वैज्ञानिकों ने इन Computers के विकास को अपनी योजना का नाम नॉलेज इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (Knowledge Information Processing System) अर्थात् किप्स (KIPS) रखा है।

इस पीढ़ी के Computers अभी भी विकास की स्थिति में ही हैं। इन Computers में Artificial Intelligence को प्रयोग करने की योजना है। इनसे Voice Recognition एवं Image Control के कार्य अत्यन्त दक्षता और तीव्र गति से किया जाना सम्भव हो सकेगा। 

परन्तु भविष्य में Computer की अब तक की Generation इलेक्ट्रॉन के प्रवाह पर आधारित हैं, पदार्थ के मूलभूत कणों में एक इलेक्ट्रॉन के स्थान पर प्रकाश के मूलभूत कण फोट्रॉन पर आधारित होंगे। लेजर किरणें भी फोट्रॉन से ही बनी होती हैं।



Computer क्या है?

Computer

Computer एक मशीन है जो कुछ तय या user द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य को संपादित करता  है। Computer एक ऐसा Electronic Device है जो User द्वारा Input किये गए Data में प्रक्रिया करके सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं, अर्थात् Computer एक Electronic Machine है जो User द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करती हैं।यह शब्द Computer, Latin के शब्द “computare” से लिया गया है। इसका अर्थ है Calculation करना या गणना करना 

Computer क्या है?


Computer का Use हम बहुत सारे कार्यों को आसानी से करने के लिए करते है ये जटिल से जटिल गणित के सवालों को एक सेकंड से कम समय में हल कर लेता है

Computer यूजर द्वारा दिए गए Instructions के आधार पर प्रोसेसिंग करके परिणाम  उत्पन्न करता है। इसके अलावा Computer की storage device में डेटा को अधिक समय तक store किया जा सकता है, जिससे कि दुबारा जरूरत पड़ते ही उसे प्राप्त किया जा सके।

ये हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों को हमारे भाषा में नहीं समझता बल्कि सिर्फ 0 और 1 के रूप में समझता है जिसे हम मशीन लैंग्वेज बोलते है इस यंत्र का सिर्फ एक use नहीं है लगभग हर जगह इसका इस्तेमाल किया जाता है 

आप अक्सर ऐसे बहुत सारे जगहों में हर रोज़ जाते होंगे जहाँ पर सरकारी या प्राइवेट कार्यालय होंगेकुछ साल पहले तक इन जगहों में लोग अपने काम के लिए फाइल्स और Ragister का इस्तेमाल किया जाता था यानि पेपरवर्क ही किया जाता था। 

लेकिन इस यंत्र ने ऐसा विस्तार पकड़ा की अब हर कार्यालय, ऑफिस में आपको सिर्फ यही यंत्र नज़र आएंगेऐसा इसीलिए की इसने किसी हिसाब को लिखने और गणना करने के घंटे के काम और उसमे होने वाली गलतियों को न के बराबर ही कर दिया है

Computer की परिभाषा

 Computer एक ऐसी Electronic Device है, जो यूजर द्वारा इनपुट किये गए डाटा को Input Device से स्वीकार करती है, फिर उसे process करने के बाद सूचनाओं को Output Device के द्वारा Result के रूप में दिखाता है

Computer का हिंदी नाम

Computer का हिंदी नाम 'संगणक' है यदि कंप्यूटर को हिंदी भाषा में ट्रांसलेट किया जाए तो इसका मूल और शुद्ध हिंदी नाम संगणक होता है

बहुत सारे लोग ऐसे भी है जिनको Computer का हिंदी नाम पता नहीं था

तो आज आपने जान ही लिया की कंप्यूटर को हिंदी में क्या कहते है

Computer फुल फॉर्म 

C      -     Commonly 

O      -     Operated 

M     -      Machine 

P      -      Particularly 

U     -      Used for 

T     -      Technical 

E     -      Educational 

R     -      Research

Computer काम कैसे करता है

इसका मुख्य से तीन काम है पहला Data को लेना जिसे हम Input कहते है दूसरा काम उस Data को Processing करने का होता है और आकिर काम उस processed डाटा को दिखाने का होता है जिसे Output कहते हैं
Computer क्या है?


    Input सबसे पहले Input Device से User Data को इसमें डालता है उसे input कहते हैं ये Information होता है, जो की कई प्रकार के होते हैं जैसे words, letters, numbers, audio, video इत्यादि

    Processing ये एक internal process होता है। Input किये हुए डाटा को program में दिए instruction के आधार पर process करता है सारे कार्यों एक सेकंड से कम समय में हल कर लेता है

    Output Processed data को रिजल्ट के रूप में मॉनिटर पर देखते हैं उसे output बोलते हैं जब डाटा process हो जाता है तो वो monitor screen, printer, audio device के जरिये हमे मिल जाता है। या सूचनाओ को Result के रूप में प्रदान करता हैं

हम जब इस यंत्र में काम करते हैं तो इसके लिए monitor का इस्तेमाल करते हैं जो की इसका एक Output Device हैं


Desktop Shortcuts क्या है?

Desktop Shortcut

एक Desktop Shortcut Computer में स्थित कोई भी document , file  या फिर अन्य कोई Item, जो Computer में है, उसकि मुख्य File एक विशेष जगह सेवे होती है। कम्प्यूटर के डेस्कटॉप पर मौजूद सभी आइटम डेस्कटॉप शॉर्टकट ही होते है। जबकि इन सभी की मुख्य फाइल या document जो उनका path या लिंक होता है बही होता है बाह चेंग नहीं होता है। 

Shortcuts का use  ऐसे दस्तावेजों और प्रोग्रामों तक शीघ्र पहुँचने के लिए  जाता हैं, जिसका आप बार - बार उपयोग करते है।  आप अपने किसी भी प्रोग्राम, दस्तावेज, प्रिंटर, डिस्क ड्राइव और दूसरे कंप्यूटर  लिए  अपने डेस्कटॉप पर या किसी भी फोल्डर में शॉर्टकट बना सकते हैं। ऐसा करने के बाद जब भी आपको उस वास्तु की आवश्यकता हो, आप  शॉर्टकट को डबल क्लिक करके तुरंत उस वस्तु  तक पंहुच सकते है। 

जैसे - यदि  आप किसी ऐसे दस्तावेज को बार-बार खोलते और बंद करते है, जिसकी सूचनाएं रोज ही बदलती रहती है तो आप इसका शॉर्टकट बनाकर अपना काफी समय बचा सकते है क्योकि तब आपको वह दस्तावेज ढूंढ़ना नहीं पड़ेगा और डेस्कटॉप पर उसके शॉर्टकट को डबल क्लिक करके उसे खोले सकेंगे। 

Shortcut Icon  Shortcuts किसी भी file, folder या program का डुप्लीकेट Icon बनाया जा सकता हैं।  जिसे की shortcut Icon कहते हैं।  यह डुप्लीकेट Icon है इसे पहचानने के लिए इस icon के उपाय एक निशान होता है जिससे की आप जान सकते है की यह shortcut आइकन हैं।

किसी वस्तु का shortcuts बनाने के लिये निम्न प्रक्रिया करना पड़ता है। 

1. Desktop Shortcut बनाने के लिए सबसे पहले उस Item या Folder  को खोलें, जिसका आप Desktop Shortcut बनाना चाहते है। 



2. अब उस आइटम या Folder जिसका शॉर्टकट बनाना जाहते है उस पर mouse से  Right Click करें।  इस Button  को click करने के बाद आपके सामने उस Item या Folder से संबंधित कार्यों कि एक सूची Open होगी 



3. इसमें आपको उस Item या Folder से संबंधित कई विकल्प दिए होंगे उनमे से आपको एक Create Shortcut option दिखाई देगा जिस पर क्लिक कीजिए, और उस Item या Folder का एक और Item बन जाएगा। जिसे  Shortcut कहते है। जिस पर एक तीर का निशान लगा होगा।



4. अब आपके द्वारा तैयार Shortcut को Desktop पर ले जाना है इस Shortcut को Desktop पर ले जाने के लिए उस shortcut  पर mouse से  Right Click करें। उनमे से आपको एक  एक ऑप्शन Copy का दिखाई देगा उस में क्लिक कीजिए।  



5. उसके बाद Desktop पर mouse से  Right Click करें।उनमे से आपको एक  एक ऑप्शन Paste का दिखाई देगा उस में क्लिक कीजिए और इस तरह आपका Desktop Shortcut Create बन कर तैयार हो जायेगा अब आप इस Item या फोल्डर को अपने Desktop से ही Access कर सकते है। 


हम Desktop Shortcut सीधे भी Create कर सकते है. इस विधि में आपको Desktop Shortcut Create को Desktop पर capy paste नही करना पड़ेगा ये सीधा ही Desktop पर Create होता है।

इसके लिए आपको Create Shortcut के स्थान पर Send to पर क्लिक करना है। यहाँ क्लिक करने पर आपके सामने कुछ विकल्पों कि एक सूची Open होगी. कुछ इस प्रकार कि होगी। अब आपको यहाँ से Desktop (create shortcut) पर क्लिक करना है और आपका Desktop Shortcut Create हो जाएगा।


Desktop Background क्या हैं?

Desktop

किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम में परिपूर्ण होने के लिए डेस्कटॉप ही पहली सीढ़ी होती है।  इसलिए हमे इसकी जानकारी होना अति आयश्यक है।  

डेस्कटॉप एक पर्सनल कंप्यूटर के ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के सबसे मौलिक और बुनियादी तत्व (basic elements) के लिए एक आईटी शब्द है। डेस्कटॉप डिस्प्ले कंप्यूटर पर डिफॉल्ट डिस्प्ले होता है जब इसे बूट किया जाता है; डॉक जैसी सहायक सुविधाएँ एक डेस्कटॉप से ​​काम करने के विकल्प के साथ अंतिम उपयोगकर्ता प्रदान करती हैं। 

Desktop Background क्या हैं?


Desktop Background

Desktop Background एक प्रकार की picture  होती है जिसको हम अपने desktop पर लगाना चाहते है।  बैकग्राउंड के तौर पर हम किसी भी प्रकार का फोटो अपने डेस्कटॉप पर लगा सकते हैं। चाहे हमने पिक्चर को डाउनलोड किया हो या अपने कंप्यूटर के अंदर पिक्चर को बनाया हो , फिर बो पिक्चर किसी भी सॉफ्टवेयर में क्यों न बनाई गई हो हम उसको डेस्कटॉप पर सेट कर सकते है। यह पिक्चर विंडो ऑन करते ही हमारे सामने प्रस्तुत हो जाती है। 

Desktop Background  कैसे बदलें?

Computer का Desktop Background बदलना बहुत ही आसान हैं। आप कुछ आसान Steps को पूरा करके अपने Computer का Wallpaper बदल सकते हैं।

Desktop Background बदलकर हम Windows Desktop को और सुंदर बना सकते हैं। आप अपने मन पसंद Photo, Picture को Desktop Wallpaper या बैकग्राउंड के लिए Set कर सकते हैं।

Windows 7 और इससे High Versions में Desktop Background के लिए Themes (Pictures, Sounds, Colors का Mix Combination) का उपयोग किया जाता हैं। Windows 7 में बहुत सारी Themes दी होती हैं। आप इनमें से अपनी पसंद की Theme को Desktop Background पर Set कर सकते हैं।

  • सबसे पहले Desktop पर कहीं भी खाली जगह पर Mouse से Right Click करने पर आपके सामने एक Menu Open होगी।नीचे दिखाई दी गई इमेज की तरह जिसमे से आपको Personalize पर क्लिक करनी हैं।
Desktop Background क्या हैं?


  • अब आपके सामने एक नई Windows ओपन होगी जिसे Windows Personalization Settings कहते है। यहाँ से आप अपने लिए Theme चुनकर Desktop Background बदल सकते है। आप किसी भी Theme पर क्लिक कीजिए। और वही Theme आपके Computer का Background बन जाएगी। यदि आप Theme को Desktop Background नही बनाना चाहते है। तो नीचे दिख रहे “Desktop Background”  पर क्लिक कीजिए।
Desktop Background क्या हैं?

            यदि आप Theme को Desktop Background नही बनाना चाहते है। तो नीचे दिख रहे “Desktop Background”  पर क्लिक कीजिए।
Desktop Background क्या हैं?


  • अब आपके सामने Desktop Background Window खुल गई है। यहाँ पर बहुत से कंप्यूटर डिफाल्ड फोटो होते है इन में से आप अपनी मन पसंद का Photo चुने और save Changes पर क्लिक करने से Desktop Background बना सकते है। 
                     
  • या यदि आप अपनी पसंद की Photo को Wallpaper बनाना चाहते है तो पहले Browse पर जाकर अपनी Picture ढूंढे जहाँ अपने फोटो सेवे किया है। इसके बाद Picture Position मे जाकर Wallpaper की Position Set कीजीए और Picture Position Set होने के बाद  Save Changes पर क्लिक कर दीजिए। 
Desktop Background क्या हैं?


  • ऐसा करते ही आपका Desktop Background बदल जाएगा। और अब आपका मन पसंद फोटो आपका Desktop Wallpaper बन गया है


आप इन तरीके से तो अपने Computer का Background Change कर ही सकते है इसके अलावा आप अन्य विधि से भी अपने Computer का Desktop Background बदल सकते है। और यह एक बहुत ही आसान तरीका हैं। 

इस विधि से कंप्यूटर बैकग्राउंड change करने के लिए 

1. सबसे पहले आप जिस Photo या Picture को अपने Computer का Wallpaper Set करना चाहते है पहले उस Photo या Picture को ओपन करें। 

2. फिर उस Photo पर right click करें और ऐसा करने पर आपके सामने Right Click Menu खुलेगी यहाँ से आपको Set as desktop background पर क्लिक करें

Desktop Background क्या हैं?


3. इतना करने के बाद आपकी पसंद की photo आपके कम्प्युटर का Wallpaper बन चुकी है जिसे आप Desktop पर जाकर देख सकते है



Desktop क्या है?

Desktop

जब आप अपने कंप्यूटर को ऑन करते हैं तो आप जिस मुख्य स्क्रीन को देखते हैं उसे डेस्कटॉप कहा जाता है। शायद हम सभी लोगों को पता है क्योंकि इससे हम अपने घरों में Offices में दुकानों में इस्तेमाल करते हैं । ज्यादातर लोग Computer के Monitor को ही Desktop Computer मान लेते हैं परंतु ऐसा नहीं है । वह केवल एक Screen होता है जो कि हमारी CPU के अंदर चल रहे गतिविधियों को Monitor पर दिखाता है। 

किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम में परिपूर्ण होने के लिए डेस्कटॉप ही पहली सीढ़ी होती है।  इसलिए हमे इसकी जानकारी होना अति आयश्यक है।  

डेस्कटॉप एक पर्सनल कंप्यूटर के ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के सबसे मौलिक और बुनियादी तत्व (basic elements) के लिए एक आईटी शब्द है। डेस्कटॉप डिस्प्ले कंप्यूटर पर डिफॉल्ट डिस्प्ले होता है जब इसे बूट किया जाता है; डॉक जैसी सहायक सुविधाएँ एक डेस्कटॉप से ​​काम करने के विकल्प के साथ अंतिम उपयोगकर्ता प्रदान करती हैं।

जब  कंप्यूटर System में Booting की प्रक्रिया सम्पन्न हो जाती है तब जो Screen हमारे सामने दिखती है वह (Desktop) डेस्कटॉप कहलाती है। यह सभी Programs तथा उन तक पहुँचने के लिए आवश्यक Instruction है। 

Desktop क्या है?


Desktop की Background को Wallpaper कहते हैं। Computer Screen पर Blink करने वाले प्रतीक को Cursor कहते हैं। Icon Programs से जुड़ा Shortcut Picture होता है जो Desktop पर होता है जिस पर Double click करने पर Programs Run होता हैं या File खुलती है।

Desktop पर मुख्य रूप से निम्न item  होते है

Icon 

Icon छोटा-सा Graphical Photo है जो किसी भी Program के Execution का प्रतिनिधित्व करता है। जब हम Mouse द्वारा इस Icon पर Click करते हैं। तो इससे Related programs execute हो जाता है। इनका प्रयोग Windows में होता है। इनके द्वारा Program, file तथा Folder को Desktop पर दर्शाया जाता है तथा इनके नीचे Program, File या Folder का नाम लिखा होता है। ये Icon Program के Execution के लिए Shortcut होते हैं।



डैस्कटॉप पर कुछ निम्न आइकॉन दिखाई देते है  

  • Recycle Bin जब हम किसी भी File तथा Folder को डिलीट करते हैं, तो वह Recycle Bin में जाकर स्टोर हो जाता है। Recycle Bin से हम उन Files या Folders को उनके सही स्थान पर वापस Restore कर सकते हैं। परन्तु यदि Recycle Bin से भी Delete कर दिया जाए तो उन Files या Folders को वापस Restore (वापस लाया) नहीं किया जा सकता। 


  • My Computer Icon यह Icon पर डबल क्लीक करने पर Windows Explorer ओपन होता हैं। यह Computer में Stored सभी Information को प्रदर्शित करता है। इसमें Hard Disc के भागों, Document Folders, Removable disk drive (जैसे- Floppy disk, CD, DVD आदि), Printers और दूसरे System Applications के Icon होते हैं। इन Drive में सेव किसी भी File या Program को खोल सकते हैं।  नयी फाइल सेव कर सकते हैं। इसी में सभी Programs तथा सॉफ्टवेयर  का Backup Store होता हैं। 


  • My Documents इस Icon में defalt रूप से हमारी फाइल save होती हैं। अगर हम इंटरनेट से कुछ भी डाउनलोड करते है तो वो इस Icon के अलग- अलग Folder में जाकर save होता हैं। यह Computer के Hard Drive में एक विशेष Folder है, जिसका use users अपने Personal Document, Music, Picture आदि को Store करने के लिए किया करते हैं। 

  • Shortcut Icon किसी भी file, folder या program का डुप्लीकेट Icon बनाया जा सकता हैं।  जिसे की shortcut Icon कहते हैं।  यह डुप्लीकेट Icon है इसे पहचानने के लिए इस icon के उपाय एक निशान होता है जिससे की आप जान सकते है की यह shortcut आइकन हैं। 


Task Bar

Task Bar जैसे नाम से प्रतीत होता है हमारे task  को दर्शाता है जो की Task Bar, Desktop के सबसे नीचे एक पतली पट्टी होती है, जिसके बाएँ कोने पर Start button तथा दाएँ कोने पर Clock रहती है। Task bar पर घड़ी के पास कुछ और छोटे-छोटे Icon रहते हैं जिन्हें Quick launch कहते हैं। Task bar के दाएं कोने को Notification Area भी कहते है। यह Area कई Programs के Icon, Computer Setting, Pen drive, Sound आदि के Icon भी दर्शाता है। जब भी user कोई Windows या Program खोलता है तो उस Window या Program का एक Button Task bar के मध्य भाग में आ जाता है। 



Start Menu

Task bar के बाएँ कोने पर Start Button होता है। जिस पर क्लिक करके Start menu खुलता है। इस menu में कई Option होते हैं, जैसे-  Program, Setting, Search, Favourite, Document,   Help, Run, Log Off और Turn Off या Shut Down।

  • Program यह Computer में Installed सभी Programmes की सूची दिखाता है। 
  • Favourites यह Book-Marked Web Pages का Group होता है।
  • Documents यह हाल ही में खोले गए Documents की सूची को दर्शाता है। 
  • Setting इसमें Control Panel (जिसमें Add/ Remove Programs, Add New Hardware, Modem आदि जैसे Icon होते हैं। Printer, Taskbar आदि आते हैं। 
  • Find Special file तथा Folder को Search करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 
  • Log Off वर्तमान user का Session समाप्त कर देता है परन्तु नए user के Log ON करने के लिए Computer को खुला छोड देता है। 
  • Turn off Computer को Shut Down या Restart करने के लिए प्रयोग होता है।


Window

Window, Open Documents, Programs या Folder को प्रदर्शित करता है। इन Window का आकार और स्थान आप अपने अनुरूप तय कर सकते हैं। इसलिए आप एक ही समय में कई Windows को एक साथ Displayed कर सकते हैं। 



MS Power Point के Element तथा विशेषताएं क्या है?

  MS Power Point   MS Power Point , जिसका पूरा नाम ‘ Microsoft Power Point ‘ है तथा इसे ‘ Power Point ‘ के नाम से भी जानते है, एक Presentati...